फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में 12 जुलाई 2026 को मिसौरी के कंसास सिटी स्टेडियम (Kansas City Stadium) में गत चैंपियन अर्जेंटीना (Argentina) 🇦🇷 और स्विट्जरलैंड (Switzerland) 🇨🇭 के बीच एक बेहद रोमांचक भिड़ंत देखने को मिली। इस कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में लियोनेल मेसी की कप्तानी वाली अर्जेंटीना ने एक्स्ट्रा टाइम में 3-1 से शानदार जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। यह मुकाबला फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा, जिसमें बेहतरीन गोल्स, तनाव, एक विवादास्पद रेड कार्ड और अंततः विश्व चैंपियन का अनुभव देखने को मिला ।
मैच का पहला हाफ और स्विट्जरलैंड की वापसी
मैच की शुरुआत से ही अर्जेंटीना ने अपना दबदबा बनाने की कोशिश की और उन्हें इसका फल बहुत जल्द मिल गया। 10वें मिनट में कप्तान लियोनेल मेसी (Lionel Messi) ने एक शानदार कॉर्नर किक ली, जिस पर मिडफील्डर एलेक्सिस मैक एलिस्टर (Alexis Mac Allister) ने अपनी लंबाई कम होने के बावजूद एक बेहतरीन हेडर लगाकर गेंद को सीधे नेट में पहुंचा दिया। इस शुरुआती गोल ने अर्जेंटीना को बढ़त दिला दी और स्टेडियम में मौजूद हजारों फैंस झूम उठे। पहले हाफ में अर्जेंटीना का बॉल पजेशन अधिक रहा और उन्होंने स्विस डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। हालांकि, स्विट्जरलैंड ने भी हार नहीं मानी और बेहतरीन बचाव करते हुए अर्जेंटीना को दूसरा गोल करने से रोके रखा ।
दूसरे हाफ में स्विट्जरलैंड की टीम एक नई ऊर्जा के साथ मैदान पर उतरी और उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए आक्रामक खेल दिखाया। इसका फायदा उन्हें 67वें मिनट में मिला, जब डैन एंडॉय (Dan Ndoye) ने रिकार्डो रोड्रिगेज के साथ शानदार तालमेल दिखाते हुए अर्जेंटीना के डिफेंस को भेद दिया और गेंद को एमिलियानो मार्टिनेज (Emiliano Martínez) के पास से गोलपोस्ट में डाल दिया। इस गोल ने स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया और मैच में रोमांच चरम पर पहुंच गया। हालांकि, 72वें मिनट में मैच का रुख तब पलट गया जब स्विट्जरलैंड के स्टार फॉरवर्ड ब्रील एम्बोलो (Breel Embolo) को डाइव मारने (simulation) के कारण अपना दूसरा येलो कार्ड मिला। इस फैसले में VAR का एक नया नियम “mistaken identity” (गलत पहचान) भी लागू हुआ, क्योंकि पहले रेफरी ने लिएंड्रो पारेडेस को कार्ड दिया था, लेकिन वीएआर के हस्तक्षेप के बाद इसे पलट दिया गया और एम्बोलो को मैदान से बाहर जाना पड़ा। 10 खिलाड़ियों के रह जाने के बावजूद स्विस टीम ने गजब का जज्बा दिखाया और तय 90 मिनट तक अर्जेंटीना को कोई और गोल नहीं करने दिया, जिससे मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में चला गया।
एक्स्ट्रा टाइम का रोमांच और ऐतिहासिक जीत
एक्स्ट्रा टाइम में 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही स्विट्जरलैंड की टीम थकने लगी थी, जबकि अर्जेंटीना ने अपने अतिरिक्त खिलाड़ी का भरपूर फायदा उठाया। कोच लियोनेल स्कालोनी (Lionel Scaloni) ने टीम को लगातार अटैक करने का निर्देश दिया। 112वें मिनट में जूलियन अल्वारेज़ (Julián Alvarez) ने अपना जादू बिखेरा। उन्होंने बाईं ओर से कट करते हुए लगभग 25 गज की दूरी से एक बेहद शक्तिशाली और घुमावदार शॉट मारा जो सीधे गोल के टॉप कॉर्नर में जा घुसा। स्विट्जरलैंड के गोलकीपर ग्रेगर कोबेल (Gregor Kobel) के पास इस शानदार गोल (Golazo) को रोकने का कोई मौका नहीं था। इस गोल ने अर्जेंटीना को 2-1 की निर्णायक बढ़त दिला दी।
मैच के अंतिम क्षणों में, जब स्विस टीम बराबरी के गोल की तलाश में पूरी तरह से आगे आ चुकी थी, तब अर्जेंटीना ने एक जबरदस्त काउंटर अटैक किया। 120+1वें मिनट में थियागो अल्माडा के एक प्रयास के रिबाउंड पर लौटारो मार्टिनेज (Lautaro Martínez) ने कोई गलती नहीं की और गेंद को गोल में डालकर अर्जेंटीना की 3-1 की जीत सुनिश्चित कर दी।
इस शानदार जीत के साथ ही अर्जेंटीना ने फीफा विश्व कप के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। वे वर्ल्ड कप इतिहास की पहली ऐसी टीम बन गए हैं जिसने लगातार 12 मैचों में दो या उससे अधिक गोल किए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड उरुग्वे (Uruguay) के नाम था (11 मैच, 1930-1954)। अब बुधवार को अटलांटा में होने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना का सामना एक और मजबूत टीम इंग्लैंड (England) 🏴 से होगा , जो निश्चित तौर पर फुटबॉल इतिहास के पन्नों में एक और महामुकाबला दर्ज कराएगा।

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