पंद्रह अगस्त का दिन भारतीय इतिहास में केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह वह पवित्र दिन है जब सदियों की दासता, अनगिनत बलिदानों और निरंतर संघर्ष के बाद भारत ने खुली हवा में सांस ली थी। 15 अगस्त 1947 को, जब दुनिया सो रही थी, तब भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग उठा था। स्वतंत्रता दिवस हमें उन महान क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र-निर्माताओं की याद दिलाता है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमारे लिए एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और स्वतंत्र गणराज्य की नींव रखी। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे अनगिनत नायकों के त्याग का ही प्रतिफल है कि आज हम गर्व से तिरंगा फहराते हैं।
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय, भारत को एक अत्यंत गरीब, अशिक्षित और विभाजित देश के रूप में विरासत मिली थी। उस समय कई पश्चिमी विचारकों ने यह भविष्यवाणी की थी कि भारत का लोकतंत्र सफल नहीं होगा और यह देश अपने अंतर्विरोधों के कारण बिखर जाएगा। लेकिन आज, 7 दशकों से अधिक की यात्रा के बाद, भारत ने उन सभी आशंकाओं को निराधार साबित कर दिया है।
स्वतंत्रता के बाद विभिन्न क्षेत्रों में भारत की अभूतपूर्व उपलब्धियां
बीते दशकों में, भारत ने लगभग हर क्षेत्र में ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिसने पूरे विश्व को चकित कर दिया है। शून्य से शुरू कर आज दुनिया की एक अग्रणी शक्ति बनने तक का सफर भारत के दृढ़ निश्चय का प्रमाण है।
1. कृषि और खाद्य सुरक्षा (हरित एवं श्वेत क्रांति) 1960 के दशक में एक समय ऐसा भी था जब भारत को अपने नागरिकों का पेट भरने के लिए विदेशों (जैसे अमेरिका के PL-480 कार्यक्रम) पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन ‘हरित क्रांति’ ने भारतीय कृषि की तस्वीर बदल कर रख दी। उन्नत बीज, उर्वरक और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के माध्यम से भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना, बल्कि आज वह दुनिया के सबसे बड़े कृषि निर्यातकों में से एक है। इसके बाद डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में हुई ‘श्वेत क्रांति’ (ऑपरेशन फ्लड) ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना दिया।
2. अंतरिक्ष एवं विज्ञान (इसरो की गगनचुंबी उड़ानें) जिस देश ने अपना पहला रॉकेट साइकिल पर और पहला उपग्रह बैलगाड़ी पर रखकर लॉन्च किया था, आज उसी देश का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दुनिया के सबसे शक्तिशाली और किफायती अंतरिक्ष कार्यक्रमों में गिना जाता है।
- चंद्रयान-3: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना।
- मंगलयान: अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला भारत एकमात्र देश है।
- आदित्य एल-1 और गगनयान: सूर्य के अध्ययन के लिए मिशन और अंतरिक्ष में मानव भेजने की तैयारी यह दर्शाती है कि भारत का विज्ञान आसमान की ऊंचाइयों को भी पार कर रहा है।
3. अर्थव्यवस्था और डिजिटल बुनियादी ढांचा आजादी के वक्त जो अर्थव्यवस्था दुनिया के कुल जीडीपी के 3% से भी कम पर सिमट गई थी, आज वह दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है। इसके साथ ही, भारत ने डिजिटल क्रांति (Digital India) में जो छलांग लगाई है, वह दुनिया के लिए एक केस स्टडी है। UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से आज भारत में दुनिया के 40% से अधिक रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं। ‘जन धन योजना’ और ‘आधार’ के संयोजन से करोड़ों गरीबों को मुख्यधारा की बैंकिंग से जोड़ा गया है, जिससे सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे उनके खातों (Direct Benefit Transfer) में पहुंच रहा है।
4. रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा आज की भारतीय सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली और आधुनिक सेनाओं में से एक है। पहले जहां भारत पूरी तरह से विदेशी हथियारों के आयात पर निर्भर था, वहीं आज ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है। स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’, ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल, स्वदेशी विमानवाहक पोत ‘INS विक्रांत’ और परमाणु पनडुब्बियां भारत की सैन्य क्षमता के जीवंत उदाहरण हैं।
5. स्वास्थ्य एवं शिक्षा स्वतंत्रता के समय भारत की साक्षरता दर मात्र 12% थी, जो आज बढ़कर लगभग 78% के पार पहुंच गई है। देश में IITs, IIMs, AIIMS और केंद्रीय विश्वविद्यालयों का एक विशाल नेटवर्क स्थापित हुआ है, जिनसे निकले युवा आज सिलिकॉन वैली से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में, भारत ने चेचक और पोलियो जैसी महामारियों को जड़ से खत्म किया। हाल ही में COVID-19 महामारी के दौरान, भारत ने न केवल अपनी स्वदेशी वैक्सीन (Covaxin और Covishield) का निर्माण किया, बल्कि CoWIN प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेज टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चलाया और कई अन्य देशों को ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत मदद भी पहुंचाई।
6. बुनियादी ढांचा (Infrastructure) विश्वस्तरीय एक्सप्रेस-वे, अत्याधुनिक हवाई अड्डे, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और देश की नई पहचान बन चुकी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनें दर्शाती हैं कि भारत का बुनियादी ढांचा किस तेजी से आधुनिक हो रहा है। ग्रामीण विद्युतीकरण और हर घर जल योजना के तहत दूर-दराज के इलाकों में भी जीवन स्तर सुधर रहा है।
भविष्य का भारत: हमें आगे क्या हासिल करना है?
भारत ने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन 2047 तक, जब देश अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, ‘विकसित भारत’ (Developed India) के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमें अभी भी एक लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा तय करनी है।

1. तकनीकी नवाचार और विनिर्माण का वैश्विक हब बनना भविष्य का युद्ध और अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तकनीक पर आधारित होगी। भारत को केवल सॉफ्टवेयर सेवाओं का आउटसोर्सिंग हब बनकर नहीं रहना है, बल्कि उत्पाद नवाचार (Product Innovation) में नेतृत्व करना है। सेमीकंडक्टर निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), क्वांटम कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स के क्षेत्र में भारत को अनुसंधान एवं विकास (R&D) में भारी निवेश करना होगा। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हम दुनिया के लिए नई तकनीकें बनाएं, न कि केवल उनके उपभोक्ता रहें।
2. सामाजिक समानता और गरीबी का पूर्ण उन्मूलन हालांकि हमने करोड़ों लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है, लेकिन अभी भी अमीर और गरीब के बीच की खाई एक बड़ी चुनौती है। भविष्य के भारत में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ‘जीरो हंगर’ (शून्य भुखमरी), सभी के लिए उत्कृष्ट स्तर की मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सर्वव्यापी स्वास्थ्य सेवाएं (Universal Healthcare) हमारा प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी को बढ़ाना होगा, तभी देश अपनी वास्तविक क्षमता को प्राप्त कर सकेगा।
3. हरित ऊर्जा और पर्यावरण स्थिरता जलवायु परिवर्तन आज पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। भारत ने 2070 तक ‘नेट-जीरो’ (Net-Zero Emissions) उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर पूरी तरह से शिफ्ट होना पड़ेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (टिकाऊ कृषि) को अपनाना भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।
4. वैश्विक मंच पर कूटनीतिक और भू-राजनीतिक नेतृत्व भविष्य के भारत को वैश्विक मंच पर एक नियम-निर्धारक (Rule-maker) की भूमिका निभानी होगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता प्राप्त करना और ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज के रूप में ‘विश्व-मित्र’ की अपनी छवि को और मजबूत करना होगा। हमारी सांस्कृतिक विरासत, आयुर्वेद, योग और अहिंसा के दर्शन (Soft Power) को दुनिया भर में फैलाना होगा।
5. शिक्षा प्रणाली में मौलिक परिवर्तन नई शिक्षा नीति (NEP 2020) एक अच्छा कदम है, लेकिन इसके पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है। भविष्य में हमें ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहिए जो बच्चों को केवल रटना न सिखाए, बल्कि उनमें आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking), उद्यमशीलता और नवाचार के बीज बोए।
स्वतंत्रता दिवस का यह अवसर हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हमने क्या खोया है, क्या पाया है और हमें कहाँ जाना है। आज का भारत युवा है, ऊर्जावान है और आत्मविश्वास से लबरेज है। हमारी विविधता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि सवा अरब से अधिक भारतीय नागरिक ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्र-प्रेम के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत पुनः ‘विश्वगुरु’ के आसन पर विराजमान होगा।

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